koii gul shajar se giraa hawa se bikhar gaya so bikhar gaya | कोई गुल शजर से गिरा हवा से बिखर गया सो बिखर गया

  - Manohar Shimpi

कोई गुल शजर से गिरा हवा से बिखर गया सो बिखर गया
कभी हार भी न बना रफ़ा से बिखर गया सो बिखर गया

मुझे फ़ालतू कोई बात ही न बता बता के ज़लील कर
तेरे जो हसीन ही इंतिहा से बिखर गया सो बिखर गया

तेरे हुस्न के ही जुनून से कभी ज़र्ब ऐसे मुझे लगा
उसी ख़्वाह से यूँँ ही फिर वफ़ा से बिखर गया सो बिखर गया

किसी रोज़ ऐसे बिछड़ गया न मिला कभी न दिखा कभी
इसी दौड़-धूप में इंतिहा से बिखर गया सो बिखर गया

तिरे इस शबाब से ही कोई भी मिला ले इक ही नज़र अगर
तुझे देख के तेरे ही अदास बिखर गया सो बिखर गया

  - Manohar Shimpi

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