rah-e-ulfat hamesha sach bataaye to himaqat hai | रह-ए-उल्फ़त हमेशा सच बताए तो हिमाक़त है

  - Manohar Shimpi

रह-ए-उल्फ़त हमेशा सच बताए तो हिमाक़त है
सदाक़त की कहाँ देखी किसी ने कोई मूरत है

फ़ज़ा की गर्द में भी तो फ़रोग़-ए-हुस्न दिखता है
बयारों से कभी पूछो वो कितनी ख़ूबसूरत है

जहाँ इंसानियत है ही नहीं दुश्वार जीना है
हिसाब-ए-दर्द होता है वहाँ कैसे हुकूमत है

ख़ुदा देता ब-ख़ूबी ही दुआओं से सभी को ही
अगर है अम्न लोगों में तभी दिखती वो बरकत है

कभी भी मस'अला गहरा रहा तब बे-सहारा था
'मनोहर' साथ साया भी न दे तो फिर मुसीबत है

  - Manohar Shimpi

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