पल सुनहरे तो ज़माना ढूँढता है
सिर्फ़ आशिक़ इक बहाना ढूँढता है
एक तू है रोज़ बातें और करता
फिर सलीक़ा क्यूँ पुराना ढूँढता है
ऐ मुहब्बत ऐ मकाँ भी है न आसाँ
'उम्र भर क्यूँ आशियाना ढूँढता है
है जो दिल में गुनगुना ले मेरे हमदम
'इश्क़ का क्यूँ फिर तराना ढूँढता है
मैं यहाँ हूँ और है तू मेरे दिल में
क्यूँ किसी का फिर फ़साना ढूँढता है
'इश्क़ का आसाँ सफ़र जब हो 'मनोहर'
राह मुश्किल क्यूँ ज़माना ढूँढता है
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