फिर तो किस चीज़ की कमी होगी
संग मेरे जो शा'इरी होगी
होश सब के उड़े हुए हैं तो
वो इधर से गुज़र गई होगी
श्वेत चादर बिछा है मुझ पे और
लाल जोड़े में वो सजी होगी
दिल दहलने लगा है मेरा फिर
वो किसी और से मिली होगी
बज़्म-ए-शोरा भी आख़िरी है ये
और ग़ज़ल भी ये आख़िरी होगी
यार 'माधव' कभी ये सोचा था
ज़िंदा रहना भी बुझदिली होगी
— Murari Mandal















