दिलबर की धुन लगाना मलंगों का काम है
कश्ती को करना पार उमंगों का काम है
उल्फ़त की बात है तो सलीक़े से कीजिए
सड़कों पे फब्तियाँ तो लफंगों का काम है
धरती ने अपनी गोद में हम को पनाह दी
अंबर में फड़फड़ाना विहंगों का काम है
आज़ाद औरतें हों उड़ानों के वास्ते
डोरी से बँध के उड़ना पतंगों का काम है
दीए की फ़िक्र थी तो उजालों का इंतिज़ाम
जल-जल के होना ख़ाक पतंगों का काम है
'उपमन्यु' थाह माँग समुंदर से क्यूँ रहे
नैया से भाव-ताव तरंगों का काम है
— Nityanand Vajpayee















