गले से लगाकर गला काट डाला
लो उस ने फिर इक मनचला काट डाला
तुम्हारे बिना दिन गुज़ारे जो मैं ने
थे दिन या कोई ज़लज़ला काट डाला
मुझे डाँट कर इस क़दर कह उठे वो
कहा मैं ने फल क्यूँ फला काट डाला
मुहब्बत में धोखे की है ही रवायत
हज़ारों के दिल को जला काट डाला
अक़ीदत की बातें करो ही न मुझ से
मुझे इसने अच्छा भला काट डाला
— Nityanand Vajpayee














