आँखों में तेरे आँसुओं का झरना है
अब सोच ये इल्ज़ाम किस सर धरना है
उसके बिना भी जी तो लेंगे हम मगर
है ये तमन्ना साथ उसके मरना है
क्यूँ डर गई सब से सही हो कर भी तू
मत आदमी से डर ख़ुदास डरना है
कम पड़ गया है घर हमारा और हम
अब उनको महफ़िल में तमाशा करना है
कुछ यादें ज़िम्मेदारी सपने रख लिए
वाक़िफ़ हूँ बस्ते में क्या क्या भरना है
मरने से पहले मोहलत दे दे ख़ुदा
आ जाए वो उन बाज़ुओं में मरना है
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