आँखों में तेरे आँसुओं का झरना है
अब सोच ये इल्ज़ाम किस सर धरना है
उस के बिना भी जी तो लेंगे हम मगर
है ये तमन्ना साथ उस के मरना है
क्यूँ डर गई सब से सही हो कर भी तू
मत आदमी से डर ख़ुदा से डरना है
कम पड़ गया है घर हमारा और हम
अब उन को महफ़िल में तमाशा करना है
कुछ यादें ज़िम्मेदारी सपने रख लिए
वाक़िफ़ हूँ बस्ते में क्या क्या भरना है
मरने से पहले मोहलत दे दे ख़ुदा
आ जाए वो उन बाज़ुओं में मरना है
— Parul Singh "Noor"















