मैं क़िस्से को लिए बैठा हुआ था
कोई बस पूछ लेता क्या हुआ था
मोहब्बत तो बड़ी बाज़ी है फिर भी
मैं तो यारी में भी हारा हुआ था
उसी को जानने में लग गई उम्र
जिसे नज़दीक-तर रक्खा हुआ था
मैं साया कैसे समझाऊँ उसे अब
कि सूरज सर पे ही आया हुआ था
वो रिश्ता मुफ़्त में टूटा है जिस को
बनाने में बहुत ख़र्चा हुआ था
नई पीढ़ी भी ये कह कर बँटी है
कि बूढ़ों में भी बँटवारा हुआ था
कोई तितली चमन में आई थी पर
गुल अपने सोज़ में डूबा हुआ था
अब आ कर क्या ही शाइ'र से सुनोगे
तब आते जब वो याद आया हुआ था
कोई रोया तो याद आया है मुझ को
वो सारा वक़्त जो गुज़रा हुआ था
ज़रा सा और ही रो लेते 'रजनीश'
ज़माने बा'द तो रोना हुआ था















