gulon men rang aate hain teri KHush rang baanhon se | गुलों में रंग आते हैं तेरी ख़ुश रंग बाँहों से

  - Rakesh Mahadiuree

गुलों में रंग आते हैं तेरी ख़ुश रंग बाँहों से
मुहब्बत जूझ जाती है तेरी नाज़ुक अदाओं से

नज़र के सामने आख़िर जिगर की बात ही क्या है
कई दिल मात खाते हैं तेरी तिरछी निगाहों से

कभी हमको तुम्हारी बात भी अच्छी नहीं लगती
कभी उठते नहीं बनता तेरी ज़ुल्फ़ों के सायों से

हमें डर है तुम्हारे बा'द कोई तुम सेा नइँ आए
वगरना दिल जुदा हो जाएगा दम की पनाहों से

हमारा दिल है इक शीशा हवा में मत उछाला कर
कभी दिल टूट नइँ जाए तेरी ऐसी ख़ताओं से

बहुत उलझा बहुत टूटा हवा के ज़ोर से लेकिन
चराग़ों में अभी है रौशनी तेरी दु'आओं से

  - Rakesh Mahadiuree

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