kahaan se aayenge daam socha hua hai maine | कहाँ से आएँगे दाम सोचा हुआ है मैंने

  - Saleem Kausar

कहाँ से आएँगे दाम सोचा हुआ है मैंने
छुड़ाना है इक ग़ुलाम सोचा हुआ है मैंने

अगर मैं सूरज के साथ ढलने से बच गया तो
कहाँ गुज़ारूँगा शाम सोचा हुआ है मैंने

में इक मुसलसल सफ़र में गुम हूँ मगर वो बस्ती
जहाँ करूँँगा क़याम सोचा हुआ है मैंने

मैं एक ऐसा जहाँ बनाने की फ़िक्र में हूँ
कि जिस का हर इंतिज़ाम सोचा हुआ है मैंने

मेरी दुआ है वो आए और मैं उसे पुकारूँ
कि उस का अच्छा सा नाम सोचा हुआ है मैंने

शुरू करने का वक़्त ही तो नहीं है वर्ना
कहानी का इख़्तिताम सोचा हुआ है मैंने

मेरा अदू मेरा दोस्त बन जाएगा बिल-आख़िर
'सलीम' वो इंतिक़ाम सोचा हुआ है मैंने

  - Saleem Kausar

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