jidhar dekho udhar mehnat-kashon kii aisi haalat hai | जिधर देखो उधर मेहनत-कशों की ऐसी हालत है

  - SALIM RAZA REWA

जिधर देखो उधर मेहनत-कशों की ऐसी हालत है
गरीबों की जमातों पर अमीरों की हुकूमत है

गरीबों के घरों में रहबरों देखो कभी जा कर
वहाँ ख़ुशियाँ नहीं हैं सिर्फ़ फ़ाका और ग़ुर्बत है

कहीं इस्मत-फ़रोशी है कहीं नफ़रत कहीं दहशत
ज़माने में जिधर देखो क़यामत ही क़यामत है

कभी कलियों का मुस्काना कभी फूलों का मुरझाना
ये क़ुदरत के तक़ाज़े हैं यही गुलशन की क़िस्मत है

'रज़ा साहिब' चलो ग़ोता-ज़नी की मश्क़ करते हैं
समुन्दर के ख़ज़ाने में बड़ी अनमोल दौलत है

  - SALIM RAZA REWA

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