मोतियों की तरह जगमगाते रहो
बुलबुलों की तरह चहचहाते रहो
जब तलक आसमाँ में सितारे रहें
ये दुआ है मेरी मुस्कुराते रहो
इतनी ख़ुशियाँ मिले ज़िंदगी में तुम्हें
दोनों हाथों से सबको लुटाते रहो
हम भी तो आपके जाँ-निसारों में हैं
क़िस्सा-ए-दिल हमें भी सुनाते रहो
इन फ़ज़ाओं में मस्ती सी छा जाएगी
अपनी ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू उड़ाते रहो
रात यूँँ ही न कट पाएगी जाग कर
कुछ तो मेरी सुनो कुछ सुनाते रहो
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