चाँद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर हैउस के चेहरे से छलकता हर घड़ी इक नूर हैहुस्न पर तो नाज़ उस को ख़ूब था पहले से हीआइने को देख कर वो और भी मग़रूर है— SALIM RAZA REWA