तुझको डाँटूँ या तुझे प्यार करूँँ मैं पहले
कौन से जज़्बे का इज़हार करूँँ मैं पहले
हर ग़लत काम की तर्ग़ीब दिलाऊँ तुझको
यानी ख़ुद को ही गुनहगार करूँँ मैं पहले
ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने
कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले
चोट खाया है मेरे जिस्म का हर इक हिस्सा
कौन से हिस्से का उपचार करूँँ मैं पहले
चेहरा हो उनका हमेशा ही निगाहों के क़रीब
आँख जब भी खुले दीदार करूँँ मैं पहले
उसकी ख़ामोश निगाहों ने जो बातें की हैं
दिल ये कहता है वो इज़हार करूँँ मैं पहले
फिर तो मुमकिन ही नहीं है कोई झगड़ा प्यारे
तू अगर चाहता है वार करूँँ मैं पहले
मेरा महबूब ही तकलीफ़ का सामाँ है 'रज़ा'
उसको समझाऊँ या तकरार करूँँ मैं पहले
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