लगता है कुछ ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत की है कमी क्यूँ उठ के जा रहे हैं तेरे दरमियाँ से लोगमेरा ख़ुलूस मेरी मोहब्बत को देख करजुड़ते गए हैं आ के मेरे कारवाँ से लोग— SALIM RAZA REWA