वाहिद जमा में और मुज़क्कर में फँस गएकुछ क़ाफ़िए अरुज़ के ख़ंजर में फँस गएकुछ में तो रब्त कुछ में मुअन्नस का ऐब थामेरे हसीन शे'र तो चक्कर में फँस गए— SALIM RAZA REWA