मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझेलालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ— SALIM RAZA REWA