
फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है
बहुत है दूर तू मुझ से मगर उम्मीद बाक़ी है
मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर
सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है
— SALIM RAZA REWA
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