nazar ki dhoop men aane se pahle | नज़र की धूप में आने से पहले

  - Sarfraz Zahid

नज़र की धूप में आने से पहले
गुलाबी था वो सँवलाने से पहले

सुना है कोई दीवाना यहाँ पर
रहा करता था वीराने से पहले

खिला करते थे ख़्वाबों में किसी के
तिरे तकिए पे मुरझाने से पहले

मोहब्बत आम सा इक वाक़िआ था
हमारे साथ पेश आने से पहले

नज़र आते थे हम इक दूसरे को
ज़माने को नज़र आने से पहले

तअज्जुब है कि इस धरती पे कुछ लोग
जिया करते थे मर जाने से पहले

रहा करता था अपने ज़ोम में वो
हमारे ध्यान में आने से पहले

मुज़य्यन थी किसी के ख़ाल-ओ-ख़दस
हमारी शाम पैमाने से पहले

  - Sarfraz Zahid

Aadmi Shayari

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