ज़रा इमदाद उन की भी करो तुम अबजो अब भी मुफ़्लिसी के दर पे रहते हैंकोई एज़ाज उन के नाम भी कर दोफ़क़त दुश्मन की जो ताईद करते हैं— Saba Rao