ज़िंदगानी जब कहानी हो गई
वो कहानी ख़ुद पुरानी हो गई
ज़िन्दगी ने जो मुसर्रत पाई थी
वो ख़ुशी आँखों का पानी हो गई
जान दी दिल दे दिया सौदा किया
बात उल्फ़त की ज़बानी हो गई
बात उस ने रास्ते में जब न की
में ये समझा वो सियानी हो गई
दाग़ दामन पर हमारे जो लगे
क्या ये उल्फत की निशानी हो गई
उन के आने से हुआ मसरूर मैं
ज़िन्दगी की मेहरबानी हो गई
इश्क़ ने फेरा तसव्वुर जब मेरा
तब ज़मीं भी आसमानी हो गई
— Shadan Ahsan Marehrvi















