कभी पत्थर कभी ख़ुदा हुए मोहब्ब्त में
हम भी क्या से क्या हुए मोहब्ब्त में
मोहब्ब्त की कमाई और मिलती भी क्या
बस कुछ पत्थर जमा हुए मोहब्ब्त में
सहूलियत हम दोनों को तब आई
कि जब दोनों जवां हुए मोहब्ब्त में
कभी देखना बुलाना भी नहीं होता
हम इस तरह जुदा हुए मोहब्ब्त में
किसी एक को क्यूँ रोती है दुनिया
जब दोनों ही फना हुए मोहब्ब्त में
हमारी वफ़ा में थी शिद्दत दुनिया भर की
फिर भी "शायर" बेवफा हुए मोहब्ब्त में
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