खुली आँखों में साल गुज़रा
कई रातों में साल गुज़रा
तेरी बाहों में दिन गुज़ारे
तेरी बातों में साल गुज़रा
मुलाक़ात इक न हुई और
यूँ ही वादों में साल गुज़रा
भला किस तरह भूल जाऊँ
मैं जिन बातों में साल गुज़रा
‘करन‘ किस से जा कर कहे हम
तेरी यादों में साल गुज़रा
— karan singh rajput















