कि मेरे रास्ते में अब न आए वो ख़ुदा करे
मेरी तरह ही मुझ को भूल जाए वो ख़ुदा करे
मेरी नजर तो कब से उस पे ही टिकी हुई है यार
कि एक बार बस मुँह उठाए वो, ख़ुदा करे
मेरी ये आँखें अब तरसती है कि उस के चेहरे को
कभी मुझे आ कर गले लगाए वो, ख़ुदा करे
मैं जानता हूँ मेरी कोशिशों से होगा कुछ नहीं
कि दोस्ती का हाथ ख़ुद बढ़ाये वो ख़ुदा करे
— karan singh rajput















