बच निकल आई अब रौशनी जाल से
चल बसा आदमी अब ये जंजाल से
है कुशादा ये दिल आँख भी नम सी है
बच सको तो बचो अब इसी हाल से
देख ये मुड़ गया राह से इश्क़ का
है सही बस फ़ना होना इस चाल से
था इरादा उसे रोक लेते मगर
कर दिया फिर जुदा चूम कर गाल से
मतलबी है यहाँ हर कोई 'मुस्तजब'
भागना ठीक है इन के अफ़ज़ाल से
— Dev "Mustajab"















