मुझे इस बात का डर खा रहा है
कोई सच मुच बदलता जा रहा है
मैं सच का सामना करने लगा हूँ
मुझे भी आइना अब भा रहा है
मुझे भी जानना है जल्द ही अब
तू इतना क्यूँँ बदलता जा रहा है
मैं सब से हट के चलना चाहता हूँ
कोई मेरी तरफ़ क्यूँँ आ रहा है
तिरे दीदार में कैसी कशिश थी
मिरा चेहरा दमकता जा रहा है
कोई अंदर ही अंदर रोने वाला
मेरी लिक्खी ग़ज़ल को गा रहा है
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