मेरी आँखों को इक चेहरा ज़रूरी है
भटकते प्यासे को दरिया ज़रूरी है
अभी इस दर्द की लौ को छुपाना है
अभी दिल पर कोई पर्दा ज़रूरी है
तिरी ख़ातिर नई दुनिया बुरी होगी
मिरी ख़ातिर नई दुनिया ज़रूरी है
अदाकारी ज़रूरी है मगर फिर भी
भिखारी में हुनर होना ज़रूरी है
तुझे सृष्टि शग़फ़ है बेवफ़ाओं से
वफ़ादारो से याराना ज़रूरी है
— Sristi Singh















