के तुझे कहाँ मुझ पर ऐतिबार होता था?
दर्द होता था जब तो बेश़ुमार होता था
उस दरख़्त पर अब आते नहीं परिंदे भी
जिस की छाँव को तेरा इंतिज़ार होता था
सूइयां भी चुभ जातीं उँगलियों में गर तेरी
तीर मेरे भी दिल के आर-पार होता था
क्या बताऊँ के क्या हासिल हुआ मोहब्बत में?
बारिशों को कब सहराओं से प्यार होता था?
— Shashank Shekhar Pathak















