jis ko pa ke lagii zindagi zindagi | जिस को पा के लगी ज़िन्दगी ज़िन्दगी

  - Umesh Maurya

जिस को पा के लगी ज़िन्दगी ज़िन्दगी
खो के उसको मिलेगी कभी क्या ख़ुशी

तुम को देखूँ कि बस देखता ही रहूँ
देख कर के तुम्हे जैसे दुनिया मिली

तुम से भी झूठ कहना पड़ा भीड़ में
अब नहीं याद आती किसी की कभी

जीस्त में जिसके अपना नहीं कुछ रहा
बस उसी की हमें याद आती रही

तोड़ दो बेड़ियाँ गर ज़रूरी न हो
बोझ दिल पे रहे है ये कितना सही

लिख रहा तेरे होठों पे कोरी ग़ज़ल
तू हर इक शय में ही याद आती रही

हुस्न पे सादगी का है अपना असर
ले के डूबी है कितनों को ये सादगी

  - Umesh Maurya

Yaad Shayari

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