उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गएया'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गएहम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुईतुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए— Vikas Sahaj