कश्ती पे बैठ कर के किनारे बनाए हैआँखों के सामने वो नज़ारे बनाए हैतितली के जैसे अंग हैं फूलो सी है महकऐसे बदन पे मैं ने सितारे बनाए है— Vishna prajapati