Dr Faisal siddiqui

Dr Faisal siddiqui

@Roohani_shayari

Dr Faisal siddiqui shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dr Faisal siddiqui's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

ज़िंदगी ख़ूब दिखाती है नज़ारे उस को देखने का जो बहुत ख़ूब हुनर रखता हो — Dr Faisal siddiqui
ख़ुद को कितनी ख़ुशियों से बहला रक्खा है साथ मेरे मुस्तक़िल इक ग़म रहता है — Dr Faisal siddiqui
वफ़ा चाहना है तिजारत मोहब्बत नहीं है नफ़ा चाहने की तिलावत इबादत नहीं है — Dr Faisal siddiqui
चश्मा पहना है सब ने अलग रंग का बहस है उन में दुनिया का क्या रंग है — Dr Faisal siddiqui

Ghazal

जो तू नहीं है तो भी ये इंतिज़ार तो है मायूस है भले दिल पर बे-क़रार तो है तू ने तसल्ली सी दी यूँँ आके ख़्वाबों में जो ये तन्हा रात तो अब कुछ ख़ुश-गवार तो है तस्वीर हट गई है मेरे ये बटवे से पर इक मुस्तक़िल निशाँ है जिस से वो ज़ार तो है सूखा गुलाब देखूँ अपनी किताब में जब खु़श्बू वजूद में वो यूँँ बरक़रार तो है फ़ुर्सत मिले तो तेरी यादों में ही रहूँ मैं कुछ पल का ही सही पर कोई क़रार तो है मालूम है करेगा बर्बाद इश्क़ मुझ को तेरा जुनूँ यूँँ मुझ पर अब भी सवार तो है मजनूँ समझ में आया वो उस की कैफ़ियत भी नफ़्स-ओ-ख़याल पर यूँँ छाया ख़ुमार तो है — Dr Faisal siddiqui
ख़याल ये है अब तेरा कोई ख़याल भी नहीं मलाल ये है इस का अब कोई मलाल भी नहीं बग़ैर तेरे जीना मेरा जो कभी मुहाल था बग़ैर तेरे जीना मेरा अब मुहाल भी नहीं हताश हैं यूँँ ख़ैरियत ये मेरी पूछते हैं जो जो हाल पूछ ले रहे कोई सवाल भी नहीं ये दिल तो चाक हो चुका मगर वो तो है बे-ख़बर कि ख़ून बहता आँखों से है और लाल भी नहीं बहुत तरीक़े से जवाब देने की है सोची पर मिसाल ढूँढ़ता हूँ पर कोई मिसाल भी नहीं तवज्जोह को मैं तेरे और कितना गिड़गिड़ाता अब ज़मीर इतना गिर गया कि अब ज़वाल भी नहीं यूँँ चौंके क्यूँ हो देख कर तबाह मुझ को तुम सभी हुआ है रफ़्ता रफ़्ता ये कोई कमाल भी नहीं ये मुख़्तसर ज़माने में है जावेदाँ नहीं कोई ये इश्क़ लेते जाओ इस का इस्तिमाल भी नहीं ये लोग मशवरा हैं देते बचने का हराम से है तौर दुनिया का ये ऐसा जो हलाल भी नहीं हो जाए पहले जैसा सब है ऐसी आरज़ू कहाँ न तू रहा है वैसा और वैसा साल भी नहीं — Dr Faisal siddiqui

Nazm

तुम समझ लेना नहीं ज़्यादा कहूँगा तुम समझ लेना मैं ख़त आधा लिखूँगा तुम समझ लेना तुम्हारे बा'द मेरा हाल गर पूछो मैं अच्छा ही कहूँगा तुम समझ लेना तुम्हें जब प्यार के दिन फूल देंगे सब मैं जलता जो दिखूँगा तुम समझ लेना रहेंगे बज़्म में सब यार तू वाले मैं तुम को तुम कहूँगा तुम समझ लेना मेरी नज़्में तुम्हें मुश्किल लगे है जो ये आसाँ सी कहूँगा तुम समझ लेना दुआ दी पीर ने हो हर दुआ पूरी दुआ अब क्या करूँँगा तुम समझ लेना ये मेरा दिल मुझे धीमे से कहता है जिसे तक के थमूँगा तुम समझ लेना सताते हैं बहुत ये ख़्वाब अब मुझ को न कुछ आगे कहूँगा तुम समझ लेना ज़बानी इश्क़ की बातें नहीं होगी रहूँगा बे-ज़बाँ मैं तुम समझ लेना — Dr Faisal siddiqui