मोहब्बत के प्यालों में रहता हूँ मैं
नहीं होश वालों में रहता हूँ मैं
ठिकाना मेरा कोई पूछे अगर
तो कहना ख़यालों में रहता हूँ मैं
गुलाबों को देखा है जबसे वहाँ
तुम्हारे ही बालों में रहता हूँ मैं
ये राँझा ये मजनूँ किताबी हुए
कि ताज़ा मिसालों में रहता हूँ मैं
दिवानी रही मुश्क-ए-ख़ालिस की वो
सो अक्सर ग़ज़ालों में रहता हूँ मैं
— Dr Faisal siddiqui















