वैसा क़रार फिर कभी आया नहीं मुझे
तेरे अलावा और कोई भाया नहीं मुझे
इक लाश तेरी आँखों में अरसे से क़ैद है
और अरसे से किसी ने भी पाया नहीं मुझे
तेरे ख़याल ने गुल-ए-रुख़्सार कर दिया
अब तक किसी ने ऐसे सजाया नहीं मुझे
— Dr Faisal siddiqui
तेरे अलावा और कोई भाया नहीं मुझे
इक लाश तेरी आँखों में अरसे से क़ैद है
और अरसे से किसी ने भी पाया नहीं मुझे
तेरे ख़याल ने गुल-ए-रुख़्सार कर दिया
अब तक किसी ने ऐसे सजाया नहीं मुझे
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