ख़याल ये है अब तेरा कोई ख़याल भी नहीं
मलाल ये है इस का अब कोई मलाल भी नहीं
बग़ैर तेरे जीना मेरा जो कभी मुहाल था
बग़ैर तेरे जीना मेरा अब मुहाल भी नहीं
हताश हैं यूँ ख़ैरियत ये मेरी पूछते हैं जो
जो हाल पूछ ले रहे कोई सवाल भी नहीं
ये दिल तो चाक हो चुका मगर वो तो है बे-ख़बर
कि ख़ून बहता आँखों से है और लाल भी नहीं
बहुत तरीक़े से जवाब देने की है सोची पर
मिसाल ढूँढ़ता हूँ पर कोई मिसाल भी नहीं
तवज्जोह को मैं तेरे और कितना गिड़गिड़ाता अब
ज़मीर इतना गिर गया कि अब ज़वाल भी नहीं
यूँ चौंके क्यूँ हो देख कर तबाह मुझ को तुम सभी
हुआ है रफ़्ता रफ़्ता ये कोई कमाल भी नहीं
ये मुख़्तसर ज़माने में है जावेदाँ नहीं कोई
ये इश्क़ लेते जाओ इस का इस्तिमाल भी नहीं
ये लोग मशवरा हैं देते बचने का हराम से
है तौर दुनिया का ये ऐसा जो हलाल भी नहीं
हो जाए पहले जैसा सब है ऐसी आरज़ू कहाँ
न तू रहा है वैसा और वैसा साल भी नहीं















