तुम समझ लेना

नहीं ज़्यादा कहूँगा तुम समझ लेना
मैं ख़त आधा लिखूँगा तुम समझ लेना

तुम्हारे बा'द मेरा हाल गर पूछो
मैं अच्छा ही कहूँगा तुम समझ लेना

तुम्हें जब प्यार के दिन फूल देंगे सब
मैं जलता जो दिखूँगा तुम समझ लेना

रहेंगे बज़्म में सब यार तू वाले
मैं तुम को तुम कहूँगा तुम समझ लेना

मेरी नज़्में तुम्हें मुश्किल लगे है जो
ये आसाँ सी कहूँगा तुम समझ लेना

दुआ दी पीर ने हो हर दुआ पूरी
दुआ अब क्या करूँगा तुम समझ लेना

ये मेरा दिल मुझे धीमे से कहता है
जिसे तक के थमूँगा तुम समझ लेना

सताते हैं बहुत ये ख़्वाब अब मुझ को
न कुछ आगे कहूँगा तुम समझ लेना

ज़बानी इश्क़ की बातें नहीं होगी
रहूँगा बे-ज़बाँ मैं तुम समझ लेना

— Dr Faisal siddiqui

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