बर्बाद हूँ ख़राब हूँ
रख फ़ासला अज़ाब हूँ
लब पर लगाना सोच कर
बरसों रखी शराब हूँ
सब नूर-ए-माहताब है
मैं दाग़-ए-माहताब हूँ
नाकामी गर सवाल है
तो पुख़्ता मैं जवाब हूँ
सहमी हुई सी जान का
सहमा हुआ सा ख़्वाब हूँ
— Dr Faisal siddiqui
रख फ़ासला अज़ाब हूँ
लब पर लगाना सोच कर
बरसों रखी शराब हूँ
सब नूर-ए-माहताब है
मैं दाग़-ए-माहताब हूँ
नाकामी गर सवाल है
तो पुख़्ता मैं जवाब हूँ
सहमी हुई सी जान का
सहमा हुआ सा ख़्वाब हूँ
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling