10
0 Likes
9
0 Likes
मिरे जनाज़े में आने से डर रहा था वो
जो खा गया था मिरे नाम की क़सम झूटी
जो खा गया था मिरे नाम की क़सम झूटी
8
0 Likes
7
0 Likes
ये दिल के ज़ख़्म हैं भरने की कोई आस नहीं
इलाज-ए-इश्क़ किसी चारागर के पास नहीं
इलाज-ए-इश्क़ किसी चारागर के पास नहीं
6
0 Likes
5
0 Likes
4
0 Likes
3
0 Likes
किसी मुक़ाम पे दिल को मेरे क़रार नहीं
अज़ाब-ए-याद से निकले तो कू-ए-यार चले
मुझे भले न मिले पर ग़ज़ल को प्यार मिले
मिरी ग़ज़ल से किसी का तो कारोबार चले
उसी दुकान के बाहर खड़ा मिलूँगा तुम्हें
जहाँ लिखा था नक़द आज कल उधार चले
मैं उस की बज़्म में उस ज़ाविए पे बैठा हूँ
जहाँ से तीर-ए-नज़र दिल के आर पार चले
बराए-इश्क़ हम आए थे बे-क़रार बहुत
जो हम-किनार हुए और बे-क़रार चले
2
0 Likes
1
0 Likes










