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Top 10 of
Alok Kumar 'Tabiib'
SHER
बनाते हैं महल ख़्वाबों के पर रहते नहीं उस में
ज़माने वाले हम जैसों को ही मजदूर कहते हैं
Alok Kumar 'Tabiib'
10
SHER
उस की जानिब देख रहा हूँ ले कर सौ इम्कान
कजरारी आँखें हैं जिस की ख़ंदा-लब पहचान
Alok Kumar 'Tabiib'
9
SHER
मिरे जनाज़े में आने से डर रहा था वो
जो खा गया था मिरे नाम की क़सम झूटी
Alok Kumar 'Tabiib'
8
SHER
कर लूँ मैं अगर क़ाफ़िया-पैमाई ज़रा और
आ जाए ग़ज़ल में मिरी रानाई ज़रा और
Alok Kumar 'Tabiib'
7
SHER
ये दिल के ज़ख़्म हैं भरने की कोई आस नहीं
इलाज-ए-इश्क़ किसी चारागर के पास नहीं
Alok Kumar 'Tabiib'
6
SHER
रिहाई लफ़्ज़ से अहल-ए-मुहब्बत ख़ौफ़ खाते हैं
परिंदे इश्क़ के वापस क़फ़स में लौट आते हैं
Alok Kumar 'Tabiib'
5
SHER
तुम कल पसंद आए थे वो इत्तिफ़ाक़ था
तुम आज भी पसंद हो ये इंतिख़ाब है
Alok Kumar 'Tabiib'
4
SHER
अज़ल से मेरी ख़ुदा से यही लड़ाई है
हमें मिलाया ही क्यूँ गर लिखी जुदाई है
Alok Kumar 'Tabiib'
3
GHAZAL
हक़ीक़तों को सदा कर के दर-किनार चले
ख़याल-ए-यार में हम ज़िन्दगी गुज़ार चले
Alok Kumar 'Tabiib'
2
GHAZAL
मुहब्बत आज़माना चाहता हूँ
मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Alok Kumar 'Tabiib'
1
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