Deva morya 'Raahi'

Deva morya 'Raahi'

@devamory1996

Deva morya 'Raahi' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Deva morya 'Raahi''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

रास्ते पलकें बिछाएँगे यहाँ मंज़िलों का रुख़ बदल जाए अगर — Deva morya 'Raahi'
रोटियाँ तक़्सीम करने की क़सम खाते हैं जो ज़हर वो ही घोलते हैं मुल्क के आहार में — Deva morya 'Raahi'
कल तलक जो साथ चलने की क़सम खाते रहे आज हम को देख वो नज़रें चुराने लग गए — Deva morya 'Raahi'
जो परिंदे उड़ रहे थे कल तलक आज बैठे हैं लहू की धार पर — Deva morya 'Raahi'
जीत की उम्मीद भी मर जाएगी आख़िरी सिक्का उछल जाए अगर — Deva morya 'Raahi'
ज़िंदगी भर जो न आए पूछने तक हाल भी आज वो कंधे मिरी मय्यत उठाने लग गए — Deva morya 'Raahi'
अँधेरा पी लिया जिस ने भी अपनी रूह के अंदर उसे सूरज का कोई डर दिखाया जा नहीं सकता — Deva morya 'Raahi'
जहाँ इंसानियत की रौशनी दम तोड़ देती है वहाँ फिर कोई भी दीपक जलाया जा नहीं सकता — Deva morya 'Raahi'
दुश्मनों से कर मुलाक़ातें मगर साथ उन के मयकशी अच्छी नहीं — Deva morya 'Raahi'

Ghazal

किसी ने कर दिया है आज इतना दूर ग़ज़लों से बता कैसे मिरे चेहरे में लाऊँ नूर ग़ज़लों से हुनर बख़्शा हो कितना भी यही समझा ज़माने ने भला क्या पेट भरते हैं कभी मज़दूर ग़ज़लों से बहुत कमज़ोर रक्खी थी किसी ने नींव ख़्वाबों की इमारत अब नहीं बनती है चकनाचूर ग़ज़लों से कहाँ मुमकिन था मिसरों से सुख़न-वर दिल बना देगा मगर अब देख बदला है यही दस्तूर ग़ज़लों से यहाँ तक आ गए हो तो ज़रा ये शोर भी सुन लो सजी है आज भी महफ़िल सनम मशहूर ग़ज़लों से तुझे गर साथ रखना है इन्हें ले कर चला जा तू मकाॅं ख़ाली कराना है मुझे मग़रूर ग़ज़लों से मिरी इस ज़िंदगी में इक तमाशा रोज़ होता है मगर लगता नहीं राही कभी मजबूर ग़ज़लों से — Deva morya 'Raahi'
इश्क़ में अब उठ रही तलवार मेरे नाम से तुम सभी करते थे पहला वार मेरे नाम से इश्क़ज़ादे ये नतीजा ख़ुद ही आ कर देख लें जीत होती है तो कुछ की हार मेरे नाम से मैं तिरे तो नाम तक को सीने पर लिख लूँ मगर छोड़ के आएगा तू घर बार मेरे नाम से तेरे महलों में कभी जाता नहीं तो क्या हुआ काँपते हैं आज तक दरबार मेरे नाम दिल समुंदर बन चुका था रेत का फिर भी करीं इस तरफ़ की कश्तियाँ उस पार मेरे नाम से जब से मैं ने खोल डाले हैं ज़खीरे सोग के हर तरफ़ खुलने लगे बाज़ार मेरे नाम से रौशनी से क्यूँँ फ़रोज़ाँ ज़ा रहा ये शहर को हर गली में क्यूँँ जलें अश'आर मेरे नाम से — Deva morya 'Raahi'