जहाँ नफ़रत की दीवारों ने रस्ते रोक रक्खे होंवहाँ चाहत का कोई गुल खिलाया जा नहीं सकतामुसाफ़िर सो गया है अब थकन की गोद में 'राही'उसे यादों की दस्तक से जगाया जा नहीं सकता— Deva morya 'Raahi'