जब जब देखा है रहमत से देखा हैतुम को मैं ने अब मुद्दत से देखा हैइन बे-मतलब की बातों को जाने दोमैं ने कब किस को नफ़रत से देखा हैतेरा चेहरा आख़िर कैसे भूलूँ मैंतुझ को ख़्वाबों में इज़्ज़त से देखा हैदेवा मौर्य राही— Deva morya 'Raahi'