Devraj Sahu

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@filmicdevv

Devraj Sahu shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Devraj Sahu's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

यहाँ कुछ हैं जो तन्हाई से भी उभरे तिरे तो चश्म में डूबा मुसाफिर हूँ — Devraj Sahu
के हर तरफ़ से अब जी भीगा लग रहा बारिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है — Devraj Sahu
ये बात नहीं की उस को बात नहीं करनी दिन एक नहीं गुज़रा गर रात नहीं करनी — Devraj Sahu
तू नखरे कर बहाने तो बनाता है न जाने दिल तुझे क्यूँँ झेल जाता है — Devraj Sahu

Ghazal

उसे मैं ने तो ख़ुद से ही उजड़ते अब भी देखा है तो अब उस को ही ख़ुद से ही झगड़ते अब भी देखा है वो अपने ही ख़यालों में उलझता ही तो रहता है अमूमन मैं ने तो उस को बिछड़ते अब भी देखा है अकेला ही मगर लड़ कर के वो सपना तो देखा है न उस के चाहने पर भी बिगड़ते अब भी देखा है की ये कीचड़ के कारण पेड़ तो गलता तो बनता है मैं तो उस पेड़ के जड़ को उखड़ते अब भी देखा है बुलंदी पर खड़े होकर भी नीचे ही वो रहता है उसे हर रोज़ औ' हर दिन रगड़ते अब भी देखा है निजी जीवन से पेशे को अलग करते भी देखा है मग़ज़ औ' दिल को रोजाना अकड़ते अब भी देखा है — Devraj Sahu