जो भूल के नहीं भुला सके वो ख़्वाब दे दियामिरा जी मचल रहा है ए'तिबार हो रहातिरे जसद की ये जो 'इत्र में गुलाब खिल रहाकदम कदम पे इश्क़ का ही इंहिसार हो रहा— Devraj Sahu