रंजिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

साजिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

कुछ और भी है बात सुनने को तिरा
पुर्सिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

मैं ने कहा इतना थका देती मुझे
वर्ज़िश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

के हर तरफ़ से अब जी भीगा लग रहा
बारिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

अब इश्क़ की बातें ज़रा कम लग रही
आतिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

मंज़र तो बस मंज़र ही है अब हर दफा
बख़्शिश ही थी तेरी या फिर कुछ और है

— Devraj Sahu

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Baarish Shayari

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