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Kaleem Aajiz
SHER
ग़म है तो कोई लुत्फ़ नहीं बिस्तर-ए-गुल पर
जी ख़ुश है तो काँटों पे भी आराम बहुत है
Kaleem Aajiz
10
GHAZAL
तुझे संग-दिल ये पता है क्या कि दुखे दिलों की सदा है क्या
कभी चोट तू ने भी खाई है कभी तेरा दिल भी दुखा है क्या
Kaleem Aajiz
9
GHAZAL
मिरा हाल पूछ के हम-नशीं मिरे सोज़-ए-दिल को हवा न दे
बस यही दुआ मैं करूँँ हूँ अब कि ये ग़म किसी को ख़ुदा न दे
Kaleem Aajiz
8
GHAZAL
वो सितम न ढाए तो क्या करे उसे क्या ख़बर कि वफ़ा है क्या?
तू उसी को प्यार करे है क्यूँँ ये 'कलीम' तुझ को हुआ है क्या?
Kaleem Aajiz
7
GHAZAL
ये समुंदर है किनारे ही किनारे जाओ
इश्क़ हर शख़्स के बस का नहीं प्यारे जाओ
Kaleem Aajiz
6
GHAZAL
मत बुरा उस को कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं
वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी नहीं
Kaleem Aajiz
5
GHAZAL
इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो
रोज़ एक ग़ज़ल हम से कहलवाए चलो हो
Kaleem Aajiz
4
SHER
ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
3
GHAZAL
ये समुंदर है किनारे ही किनारे जाओ इश्क़ हर शख़्स के बस का नहीं प्यारे जाओ
यूँँ तो मक़्तल में तमाशाई बहुत आते हैं
Kaleem Aajiz
2
SHER
1
Gautam Rajrishi
Rehman Faris
Kaif Bhopali
Bashir Badr
Ritesh Rajwada
Zafar Gorakhpuri
Altaf Mashhadi
Aks samastipuri
Jalal Lakhnavi
Azhar Faragh