जहाँ देखो उधर पत्नी की बस इक ये शिकायत है
    नहीं देते मुझे तुम वक़्त जिसकी मुझको चाहत है
    Poet Mohit Chauhan
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    ज़िन्दगी आजकल यूँ गुज़र जा रही
    हर खुशी साथ में एक गम ला रही
    Poet Mohit Chauhan
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    किसी को क्या कहूँ क्या दोष दूँ मैं अब
    मुकद्दर में जुदा होना लिखा था जब
    Poet Mohit Chauhan
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    गुमशुदा हो गया चैन दिल का मेरा
    इस कदर है चला मुझ पे जादू तेरा
    Poet Mohit Chauhan
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    दूर होकर भी तू दूर मुझसे नहीं
    दर्द बन के रहे दिल में तू हर घड़ी
    Poet Mohit Chauhan
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    हर किसी ने छला दोस्त बन कर मुझे
    इसलिए दोस्ती से लगे डर मुझे
    Poet Mohit Chauhan
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    हर क़दम पर मिला सिर्फ़ धोखा मुझे
    अब किसी पर नहीं है भरोसा मुझे
    Poet Mohit Chauhan
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    सादगी हुस्न का ज़िक्र जब भी हुआ
    याद आया मुझे नाम सिर्फ़ इक तेरा
    Poet Mohit Chauhan
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    तेरी वीरान दुनिया को किया आबाद मैंने
    मोहब्बत में तेरी खुद को किया बर्बाद मैंने
    Poet Mohit Chauhan
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    नशा ये हुस्न का तेरे मुझे फीका नहीं लगता
    शफ़क़ का रंग भी मुझको तेरे जैसा नहीं लगता

    चखी है चाशनी जबसे तेरे इन सुर्ख होंठो की
    तेरे लब के सिवा कुछ भी मुझे मीठा नहीं लगता
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    Poet Mohit Chauhan
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