Harpreet Kaur

Top 10 of Harpreet Kaur

    वक़्त को ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं
    और तो चाहिए अब नसीहत नहीं

    मानते हम कि हालात की बात है
    बेवजह सी हमारी ये फ़ुर्क़त नहीं

    तुम ने मसरूफ़ियत का बहाना किया
    रू-ब-रू हम से होने की फ़ुर्सत नहीं

    मंज़िलों का जो तुम रास्ता बन गए
    अब किसी और की हम को हसरत नहीं

    'प्रीत' को तुम कहाँ ले के आए सनम
    चाहतों के लिए यूँ फ़ज़ीहत नहीं
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    Harpreet Kaur
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    ज़िंदगी ख़ुद को तेरी चाहत में बेहतर कर लिया
    दर्द से रख राब्ता ज़ख़्मों को रहबर कर लिया

    कौन अपना कौन बेगाना कभी जाने न हम
    जो मिला है प्यार से उस को ही दिलबर कर लिया

    ग़म के तूफा़ँ साहिलों से जो लगे टकराने तो
    छोटी छोटी हर ख़ुशी को फिर समुंदर कर लिया

    हो न मुमकिन कैसे हाल-ए-दिल किसी को दिखला दे
    फूल से नाज़ुक से एहसासों को पत्थर कर लिया

    'प्रीत' को अब फ़िक्र भी ऐसे ज़माने की नहीं
    उस ख़ुदा की ही रज़ा को यूँ मुक़द्दर कर लिया
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    Harpreet Kaur
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    शादी कर बीवी को लाने की ज़रूरत क्या थी
    यूँ मुसीबत को बुलाने की ज़रूरत क्या थी

    ज़िन्दगी में सुकूँ जो प्यारा नहीं था तुम को
    ऐसी आफ़त को ले आने की ज़रूरत क्या थी

    मिल न पाएगी यूँ आज़ादी की चाबी तुम को
    दिल पे ताला ये लगाने की ज़रूरत क्या थी

    दोस्तों से न मुसलसल हो मुलाक़ात अब तो
    या ख़ुदा बिजली गिराने की ज़रूरत क्या थी

    ज़ाइक़ा था लगा बाहर की जो बिरयानी का
    घर की फिर दाल यूँ खाने की ज़रूरत क्या थी
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    Harpreet Kaur
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    याद आते रहे भुलाने पर
    ज़ख़्म दे दर्द सूख जाने पर

    मेरे अपनों ने तन्हा छोड़ा है
    अब भरोसा नहीं ज़माने पर

    ख़्वाहिशों का कहीं सिरा न मिले
    ज़िंदगी ढूँढ़ते मुहाने पर


    वक़्त रुकता भी तो नहीं है कभी

    ये समझ आया आज़माने पर
    प्रीत ग़म की न कर नुमाइश यूँ

    कौन करता यक़ीं फ़साने पर
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    Harpreet Kaur
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    इन लबों पे हँसी नहीं होती
    हँसती आँखें ख़ुशी नहीं होती

    ग़म भुलाने को मयक़दे हैं बहुत
    मुझ से ये मय-क़शी नहीं होती

    ले के दिल बैठे कितने राहों में
    बेबसी आशिक़ी नहीं होती

    हारते जो न है कभी ख़ुद से
    मौक़े'' की फिर कमी नहीं होती

    'प्रीत' ये ज़िन्दगी समुंदर है
    कोई अब तिश्नगी नहीं होती
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    Harpreet Kaur
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    होता हैराँ मन तमाशा ये सियासत देख कर
    ये जो कुर्सी पाने की हद पार चाहत देख कर

    वादे तो पूरे नहीं कोई भी नेता कर सके
    अपना मतलब भर निकाले ये रिवायत देख कर

    हर क़दम पे ये लड़ाई रोटी और पानी की है
    शर्म आती देश की ऐसी तो हालत देख कर

    वोट पाने को सदाक़त से भरा आचार हो
    रोए दिल इन की सभी नापाक हरकत देख कर

    है न अब महफ़ूज़ माँ बहनों की भी तो आबरू
    झुक गईं आँखें वतन में फिर ज़लालत देख कर
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    उन का महफ़िल में आना ग़ज़ब हो गया
    यूँ नज़र का मिलाना ग़ज़ब हो गया

    चाँद को देखना चाहते है सभी
    वो झलक भर दिखाना ग़ज़ब हो गया

    है बिखरने लगे हर कहीं जो महक
    उन का तो खिलखिलाना ग़ज़ब हो गया

    बज़्म की रात में जो हुई रौशनी
    वो नज़र को उठाना ग़ज़ब हो गया

    दिल को था में यहाँ बैठा हर कोई अब
    उस ग़ज़ल को सुनाना ग़ज़ब हो गया
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    चाहतों को बस भुलाना रह गया
    साथ यादों का तराना रह गया

    छोड़ कर काफ़िर गया है इस तरह
    याद वो बीता ज़माना रह गया

    हिस्से दर्द-ए-ग़म यूँ आए हैं सभी
    हाँ फ़क़त आँसू बहाना रह गया

    हो रही मुश्किल बड़ी अब ज़िंदगी
    बाक़ी रिश्तों को निभाना रह गया

    'प्रीत' किस से हाल दिल का पूछिए
    हर ज़बाँ पे इक फ़साना रह गया
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    Harpreet Kaur
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    जीतती ज़िंदगी हार जाने के बा'द
    ख़ुश हुआ दिल ये हर ग़म भुलाने के बा'द

    अपने और ग़ैर का फ़र्क़ जाने हैं हम
    जीने का है मज़ा मुस्कुराने के बा'द

    हम सफ़र का पा कर साथ दुनिया हसीं
    माने है सब को फिर आज़माने के बा'द

    अब नहीं हम शिकायत किसी से करें
    ख़ुद को पाया है हम ने ज़माने के बा'द

    प्रीत की ख़्वाहिशें अब नहीं कोई भी
    मिल गया सब है हमदम को पाने के बा'द
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    Harpreet Kaur
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    ऐसा महसूस जब हो कि जन्नत में है
    समझे माँ बाप की फिर रियासत में है

    मिलता है चैन जिन की पनाहों तले
    इक अजब सा सुकूँ इस ज़ियारत में है

    हस्ती मेरी तो उन से ही महफ़ूज़ सी
    ज़िंदगी ये मेरी तो हिफ़ाज़त में है

    हँस के जो वारते मुझ पे जग की ख़ुशी
    ये अदा बाग़बाँ की ही फ़ितरत में है

    'प्रीत' कुछ भी न तो और अब चाहती
    इन लकीरों की वो तो रफ़ाक़त में है
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    Harpreet Kaur
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