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तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुम से कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम
कोई तुम से कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम
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अपना पूरा ज़ोर लगा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
नफ़रत की दीवार गिरा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
नफ़रत की दीवार गिरा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
इश्क़ के मुनकिर पूछ रहे हैं पहले गर्दन देगा कौन
अब तो दोनों हाथ उठा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
तेरी चुप्पी ये साबित कर देगी कि तू बुज़दिल है
वरना आँख से आँख मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
इस धरती से उस अंबर तक एक ही नारा गूँजेगा
मेरे संग आवाज़ मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
Read Fullअब तो दोनों हाथ उठा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
तेरी चुप्पी ये साबित कर देगी कि तू बुज़दिल है
वरना आँख से आँख मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
इस धरती से उस अंबर तक एक ही नारा गूँजेगा
मेरे संग आवाज़ मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
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Vashu Pandey
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इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में
हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ
Read Fullहाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ
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बड़े बुज़दिल हैं लेकिन फिर भी हिम्मत कर रहे हैं हम
तुम्हारे शहर में रह कर मोहब्बत कर रहे हैं हम
तुम्हारे शहर में रह कर मोहब्बत कर रहे हैं हम
अभी तक ठीक से आई नहीं है धुन मोहब्बत की
गुज़िश्ता सात जन्मों से रियाज़त कर रहे हैं हम
तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुम से कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम
वगरना जिस को छोड़ा है, उसे मुड़कर नहीं देखा
ग़नीमत जान के तुझ से शिकायत कर रहे हैं हम
मेरे रोने से ख़ाहिफ़ हैं मगर क्या इस से वाक़िफ़ हैं
कि ये मातम भला किस की बदौलत कर रहे हैं हम
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उम्र भर यूँ ही जलते रहे रौशनी भी नहीं कर सके
गाँव करना था रौशन हमें इक गली भी नहीं कर सके
गाँव करना था रौशन हमें इक गली भी नहीं कर सके
हम को इतना डराया गया मेरे मौला तेरे नाम से
तेरे बंदे कभी ठीक से बंदगी भी नहीं कर सके
बेख़ुदी में उठे थे क़दम आ फँसे ऐसे रस्ते पे हम
मंज़िलें भी नहीं मिल सकी वापसी भी नहीं कर सके
छोटे घर के बड़े थे सो हम ज़िम्मेदारी निभाते रहे
आशिक़ी तो बड़ी बात थी ख़ुद-कुशी भी नहीं कर सके
काम दो ही थे करने हमें आशिक़ी या तो फिर शा'इरी
आशिक़ी भी नहीं कर सके शा'इरी भी नहीं कर सके
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