ये लगभग ग़ैर-मुमकिन है ख़ुदाया पर निकल जाए
चराग़ों के दिमाग़ों से हवा का डर निकल जाए
इसी डर से सफ़र भर में कहीं आँखें नहीं झपकी
कहीं ऐसा न हो ग़लती से तेरा घर निकल जाए
तरीक़ा एक ही है बस सुकूँ पाने का दुनिया में
यहाँ से दिल निकल जाए यहाँ से सर निकल जाए
— Vashu Pandey















