रात-रात भर जगने वाले तेरी ख़ैर

आसमान को तकने वाले तेरी ख़ैर

उस की सब तस्वीरें घर से बाहर फेंक
ख़ुद दीवार से लगने वाले तेरी ख़ैर

वक़्त हमेशा एक सा थोड़ी रहता है
मेरे ऊपर हँसने वाले तेरी ख़ैर

वो ख़त में आयात लिखा करती थी और
लिखती थी कि पढ़ने वाले तेरी ख़ैर

— Vashu Pandey

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